माइग्रेन सिर्फ़ तेज़ सिरदर्द से कहीं ज़्यादा है। यह एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में रुकावट डाल सकती है, जिससे तेज़ दर्द और कई तरह के कमज़ोर करने वाले लक्षण हो सकते हैं।

आम सिरदर्द के उलट, माइग्रेन में अक्सर मतली, रोशनी से सेंसिटिविटी और ऑरा नाम की देखने में दिक्कत जैसे दूसरे असर भी होते हैं।

माइग्रेन को असरदार तरीके से मैनेज करने के लिए कारणों को समझना और लक्षणों को पहचानना ज़रूरी है।

माइग्रेन के लक्षण

👉थकान या बहुत ज़्यादा नींद आना:

माइग्रेन अटैक शुरू होने से पहले, अक्सर प्रोड्रोम फ़ेज़ में लोगों को बहुत ज़्यादा थकान या नींद आ सकती है।

👉मूड में बदलाव:

माइग्रेन अटैक से पहले चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन या दूसरे मूड स्विंग हो सकते हैं, जो इसके शुरू होने का संकेत देते हैं।

👉बार-बार पेशाब आना:

माइग्रेन से पहले के दिनों में अक्सर पेशाब में बढ़ोतरी देखी जाती है।

👉गर्दन में अकड़न:

कुछ लोगों को माइग्रेन अटैक से पहले गर्दन और कंधों में मांसपेशियों में खिंचाव या अकड़न महसूस होती है।

👉 खाने की क्रेविंग या भूख में बदलाव:

कभी-कभी माइग्रेन से पहले कुछ खास खाने की अचानक क्रेविंग या खाने की आदतों में कोई खास बदलाव हो सकता है।

👉रोशनी और आवाज़ से सेंसिटिविटी:

माइग्रेन से पहले या उसके दौरान लोग रोशनी (फोटोफोबिया) और आवाज़ (फोनोफोबिया) के प्रति ज़्यादा सेंसिटिव हो सकते हैं।

👉देखने में दिक्कत:

इसमें चमकती लाइट, टेढ़ी-मेढ़ी लाइनें या नज़र में ब्लाइंड स्पॉट दिखना शामिल हो सकता है, जो अक्सर ऑरा फेज़ के दौरान होता है।

👉झुनझुनी या सुन्नपन:

कुछ लोगों को चेहरे, हाथों या शरीर के दूसरे हिस्सों में, आमतौर पर एक तरफ, झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है।

माइग्रेन के कारण

️जेनेटिक फैक्टर:

माइग्रेन होने में जेनेटिक्स का अहम रोल होता है। स्टडीज़ से पता चला है कि माइग्रेन परिवारों में होता है, जिसका मतलब है कि जिन लोगों के परिवार में माइग्रेन की हिस्ट्री रही है, उन्हें इसके होने की संभावना ज़्यादा होती है।

खास जेनेटिक म्यूटेशन दिमाग के दर्द को प्रोसेस करने के तरीके पर असर डाल सकते हैं, जिससे यह ट्रिगर के प्रति ज़्यादा सेंसिटिव हो जाता है।

☑️ न्यूरोलॉजिकल बदलाव:

माइग्रेन अटैक दिमाग की एक्टिविटी में बदलाव से जुड़े होते हैं, खासकर उन हिस्सों में जो दर्द को समझने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। ब्रेनस्टेम, जो ब्लड प्रेशर और दर्द महसूस करने जैसे कई कामों को कंट्रोल करता है, माना जाता है कि माइग्रेन अटैक में शामिल होता है। इसके अलावा, ट्राइजेमिनल नर्व, जो सिर से दिमाग तक दर्द के सिग्नल भेजती है, माइग्रेन होने में अहम भूमिका निभाती है।

️हार्मोनल बदलाव:

हार्मोनल उतार-चढ़ाव माइग्रेन के सबसे जाने-माने ट्रिगर में से एक हैं, खासकर महिलाओं में। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन लेवल में बदलाव से माइग्रेन होने की संभावना बढ़ सकती है। हार्मोनल बर्थ कंट्रोल और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी भी कुछ महिलाओं में माइग्रेन की फ्रीक्वेंसी पर असर डाल सकती हैं।

️एनवायरनमेंटल ट्रिगर:

🔸तेज रोशनी या चमक

🔸तेज गंध

🔸मौसम में बदलाव

🔸शोर।

️लाइफस्टाइल फैक्टर:

🔸स्ट्रेस

🔸डाइटरी फैक्टर:

🔸नींद में गड़बड़ी

🔸डिहाइड्रेशन।

आखिरी बातें

जैसे ही आपको माइग्रेन के लक्षण दिखें, सही डायग्नोसिस और इलाज के लिए अपने हेल्थकेयर डॉक्टर से संपर्क करें।

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