हेल्थ डेस्क :ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर और अचानक होने वाली स्वास्थ्य समस्या है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है। भारत में हर साल लाखों लोग ब्रेन स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं।यह समस्या तब होती है जब दिमाग तक जाने वाले रक्त प्रवाह में रुकावट आ जाती है या दिमाग की कोई रक्त नली फट जाती है। चूंकि दिमाग शरीर के सभी अंगों को नियंत्रित करता है, इसलिए स्ट्रोक का असर बोलने, चलने, देखने और समझने की क्षमता पर पड़ सकता है।
ब्रेन स्ट्रोक क्यों होता है
दिमाग को ठीक से काम करने के लिए लगातार ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो रक्त के जरिए पहुंचते हैं। जब किसी कारण से दिमाग तक रक्त पहुंचना कम या बंद हो जाता है, तो दिमाग की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं। यही स्थिति ब्रेन स्ट्रोक कहलाती है।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना और शारीरिक निष्क्रियता प्रमुख हैं। तनाव और अनियमित जीवनशैली भी स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देती है।
ब्रेन स्ट्रोक के दो प्रमुख प्रकार
1. इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke)
यह ब्रेन स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार है। यह तब होता है जब दिमाग की किसी रक्त नली में थक्का जम जाता है या नली संकरी हो जाती है। इससे दिमाग के उस हिस्से तक रक्त नहीं पहुंच पाता। हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।
2. हेमरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke)
यह स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग की कोई रक्त नली फट जाती है और रक्त बाहर फैलने लगता है। इससे दिमाग पर दबाव पड़ता है और गंभीर स्थिति बन सकती है। अत्यधिक हाई ब्लड प्रेशर, कमजोर रक्त नलियां और कुछ जन्मजात समस्याएं इसके कारण हो सकती हैं।
स्ट्रोक के शुरुआती संकेत
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण अचानक सामने आते हैं। चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाना, हाथ या पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी, अचानक तेज सिरदर्द या देखने में दिक्कत इसके आम संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है।
