वैसे तो नियमित मालिश करना हमेशा ही फायदेमंद होता है। हर मौसम में मालिश के अलग अलग फायदे होते हैं। मानसून यानि कि बारिश के मौसम में शरीर की मालिश करने से वात दोष संतुलित होता है, जोड़ों और नसों के दर्द से राहत मिलती है, और त्वचा फंगल इंफेक्शन से सुरक्षित रहती है।

आयुर्वेद में इस मौसम को ‘वर्षा ऋतुचर्या’ कहा जाता है, जिसमें नमी और उमस के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, ऐसे में मालिश एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करती है।

 

🌟 मानसून में मालिश के मुख्य फायदे :

 

✅ वात दोष का संतुलन: वर्षा ऋतु में शरीर में प्राकृतिक रूप से ‘वात दोष’ बढ़ जाता है, जिससे जोड़ों का दर्द, अर्थराइटिस और नसों में कमजोरी होने लगती है। तेल मालिश वात को शांत करती है।

जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से राहत: उमस और ठंडी हवाओं के कारण होने वाली शारीरिक अकड़न दूर होती है। डीप टिश्यू या पोटली मसाज मांसपेशियों के पुराने दर्द को कम करने में बहुत असरदार है।

त्वचा के संक्रमण से बचाव: मानसून में फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा होता है। एंटी-बैक्टीरियल तेलों से मालिश करने पर त्वचा के रोमछिद्र (pores) साफ होते हैं।

इम्यूनिटी और एनर्जी बूस्ट: बारिश के दिनों में सुस्ती और थकान महसूस होना आम है। मालिश से ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है, जिससे शरीर का एनर्जी लेवल और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

✅ बेहतर पाचन क्रिया: पेट के निचले हिस्से की मालिश करने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और गैस या अपच जैसी मानसून की समस्याओं में राहत मिलती है।

✅ मानसिक तनाव और अनिद्रा से मुक्ति: SukhoThai Spa के विशेषज्ञों के अनुसार, मालिश से नर्वस सिस्टम रिलैक्स होता है, जिससे तनाव कम होता है और गहरी नींद आती है।

 

💧 मानसून के लिए सबसे अच्छे तेल

 

💠 नारियल तेल (Coconut Oil): इसमें भरपूर एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो मानसून की चिपचिपाहट के बीच त्वचा को इंफेक्शन से बचाते हैं।

💠 तिल का तेल (Sesame Oil): आयुर्वेद के अनुसार यह वात को शांत करने और हड्डियों को मजबूती देने के लिए सबसे उत्तम है।

💠 सरसों और लहसुन का तेल: नवजात शिशुओं या बच्चों के लिए सरसों के तेल में लहसुन पकाकर हल्की मालिश करने से शरीर को गर्माहट मिलती है और सर्दी-जुकाम से बचाव होता है।

 

⚠️ मालिश के दौरान बरतें ये सावधानियां

 

🔵 गुनगुना तेल इस्तेमाल करें: हमेशा तेल को हल्का गुनगुना करके ही मालिश करें, ठंडा तेल शरीर पर लगाने से बचें।

🔵 कम तेल का उपयोग: मानसून में हवा में पहले से ही नमी होती है, इसलिए बहुत अधिक या भारी तेल (जैसे बादाम या जैतून का तेल) लगाने से बचें, इससे त्वचा पर रैशेज हो सकते हैं।

🔵 नहाने से पहले करें मालिश: मालिश करने के बाद तेल को त्वचा में सोखने के लिए 15 मिनट का आराम दें, फिर गुनगुने पानी से नहा लें।

🔵 ज्वर या बुखार में बचें: यदि आपको बुखार, डेंगू या हैवी कफ है, तो तुरंत मालिश न करें। ठीक होने के बाद की कमजोरी दूर करने के लिए मालिश की जा सकती है।

By AMRITA

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