
भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama) मधुमक्खी की गूंज जैसी ध्वनि (Humming Sound) उत्पन्न करके किया जाने वाला एक शांतिकारक श्वास अभ्यास है। यह स्ट्रेस, एंग्जायटी, और गुस्से को तुरंत कम करता है। इसे बैठकर, आंखें बंद करके और कानों को अंगूठों से बंद कर नाक से गहरी सांस लेकर व छोड़ते समय ‘हम्मम’ की ध्वनि करके किया जाता है।
भ्रामरी प्राणायाम करने की विधि :
आसन: सुखासन या पद्मासन में सीधे बैठें।
मुद्रा (षण्मुखी मुद्रा): तर्जनी उंगली को माथे पर, बीच की तीन उंगलियों को आंखों पर हल्के से रखें। अंगूठों से कानों के बाहरी छिद्र को धीरे से बंद करें।
श्वास: गहरी सांस नाक से अंदर लें।
गूंज: मुंह बंद रखें और सांस छोड़ते हुए गले से मधुमक्खी की तरह गूंजने वाली आवाज निकालें।
पुनरावृत्ति: इसे 3-5 बार या उससे अधिक समय तक दोहराएं।
भ्रामरी प्राणायाम के प्रमुख लाभ :
मानसिक शांति: यह तनाव, चिंता और डिप्रेशन को कम कर मन को शांत करता है।
अनिद्रा में सहायक: रात में सोने से पहले करने पर यह अच्छी नींद लाने में मदद करता है।
याददाश्त और एकाग्रता: यह याददाश्त तेज करता है और मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है।
ब्लड प्रेशर: यह हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक है।
शारीरिक लाभ: वर्टिगो (चक्कर आना) और टिनिटस (कान में घंटी बजना) में आराम देता है।
आंखों के लिए: यह आंखों की रोशनी को तेज करता है और चेहरे की मांसपेशियों को रिलैक्स करता है।
सावधानी:
♥ इसे हमेशा खाली पेट करना बेहतर होता है।
♥ कानों को जोर से न दबाएं, केवल हल्का दबाव दें।
♥ जिन लोगों को कान में कोई गंभीर संक्रमण हो, उन्हें इसे करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
