आज की जीवनशैली ऐसी हो गई है कि घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना पड़ता है और बाकी समय भी घर के जरूरी कामों को निपटाने में निकल जाता है। ऐसे में गर्दन और कंधों का दर्द परेशान करने लगता है।अगर स्थिति समय के साथ ज्यादा बिगड़ जाए तो सर्वाइकल की परेशानी शुरू हो जाती है, जो गर्दन और कंधे के आसपास दर्द, जकड़न और हाथों में रेफरल पेन तक पैदा कर सकती है। सर्दियों के मौसम में सर्वाइकल से पीड़ित लोगों को बहुत परेशानी होती है।

सर्द मौसम की वजह से जोड़ों और मांसपेशियों में जकड़न बढ़ जाती है, जिससे फ्रोजन शोल्डर की भी परेशानी होने लगती है। इस समस्या में हाथों को हिलाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कुछ सर्दियों में कुछ आसान उपायों से राहत पाई जा सकती है।सुबह की शुरुआत हल्की एक्सरसाइज से करें। हाथों और कंधों को हल्का मूव करें और धीरे-धीरे गर्दन की मूवमेंट करें। गर्दन को पहले दो दिशाओं में घुमाएं और फिर गोल घुमाएं। अगर गर्दन को घुमाते वक्त चक्कर आते हैं तो गर्दन को सहारा देने के लिए हाथ लगा लें।

बिस्तर पर लेटते वक्त तकिए का इस्तेमाल ठीक से करना अहम है। न बहुत ऊंचा, न बहुत नीचा तकिया लगाएं। तकिया उतना ही ऊंचा हो, जितना सिर और रीढ़ की हड्डी एक समान हो सके। जितना हो सके नरम बिस्तर का इस्तेमाल करें। बिस्तर पर मोबाइल चलाने से भी बचें।सर्दियों में नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में सहने लायक गर्म पानी लेकर अपने कंधे, गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर गर्म पानी की सिकाई करें। इससे मांसपेशियों को आराम मिलेगा और जकड़न कम होगी। इसके अलावा, रात के समय गर्म तिल के तेल से भी कंधों और गर्दन की मालिश करें। इससे दर्द और जकड़न से आराम मिलेगा।

उपायों के साथ आहार में बदलाव करना भी जरूरी है। अपने आहार में कैल्शियम और मैग्नीशियम शामिल करें। मांसपेशियों को ठीक तरीके से चलाने का जिम्मेदार मैग्नीशियम होता है। मैग्नीशियम की कमी मांसपेशियों को कमजोर बनाती है। मैग्नीशियम के लिए आहार में हरे पत्तेदार सब्जियां, दालें, मेवे में बादाम, काजू, अखरोट, कद्दू के बीज, चिया बीज और साबुत अनाज को शामिल करें। ये सभी आहार पूरे शरीर के लिए लाभकारी होते हैं। इसके साथ विटामिन बी12 भी आहार में लें।

 

 

 

 

By ANJALI

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