भारत में अब कई महिलाएं 30 के आखिर या 40 की शुरुआत में ही पेरिमेनोपॉज की स्थिति में पहुंच रही हैं. ये मेनोपॉज से पहले का वो समय है जब शरीर में हार्मोनल उतार-चढ़ाव जल्दी शुरू हो जाता है. डॉक्टर्स के मुताबिक पहले ये स्थिति 45-50 की उम्र में आती थी, लेकिन अब ये घटकर 35-40 तक आ गई है.

 

इसकी वजह है लगातार बढ़ता तनाव, नींद की कमी, ज्यादा देर बैठकर रहने वाली लाइफस्टाइल, पौष्टिक आहार की कमी, धूम्रपान और PCOS जैसी हार्मोनल बीमारियों का इलाज न करवाना. साथ ही, पर्यावरण में बढ़ते टॉक्सिन्स और मोटापे के मामले भी इस समय से पहले आने वाले मेनोपॉज के ट्रेंड को बढ़ा रहे हैं.

 

पेरिमेनोपॉज के मामले बढ़ने के कारण
  • बढ़ता तनाव: शहरी जीवनशैली, काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी से महिलाओं के हार्मोनल संतुलन पर असर पड़ रहा है। तनाव से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, जो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन को बाधित कर सकता है।
  • पर्यावरणीय कारक: पर्यावरण में मौजूद टॉक्सिन जैसे प्लास्टिक, कीटनाशक और प्रदूषण में ऐसे रसायन होते हैं, जो शरीर के प्राकृतिक हार्मोनों की नकल करते हैं या उन्हें ब्लॉक कर देते हैं। ये रसायन समय से पहले डिम्बग्रंथि (ओवेरियन) की उम्र बढ़ने और अनियमित मासिक धर्म से जुड़े हैं।
  • बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएँ: कम उम्र की महिलाओं में पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), मोटापा, डायबिटीज और थायराइड जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का प्रचलन बढ़ा है। ये स्थितियाँ हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाती हैं और पेरिमेनोपॉज के लक्षणों को जल्दी शुरू कर सकती हैं।
  • आनुवंशिकी: अगर परिवार में किसी महिला को कम उम्र में मेनोपॉज हुआ है, तो आने वाली पीढ़ी में भी इसके जल्दी होने की संभावना अधिक होती है।
  • जागरूकता में वृद्धि: आजकल पेरिमेनोपॉज के बारे में अधिक जागरूकता है। महिलाएँ और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता दोनों ही लक्षणों को बेहतर ढंग से पहचानने लगे हैं। इस वजह से, पहले जो मामले अनदेखे रह जाते थे, अब उनका निदान हो रहा है।
  • खराब खानपान और शारीरिक निष्क्रियता: अत्यधिक वजन बढ़ना या घटना और पोषण की कमी भी हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकती है, जिससे समय से पहले पेरिमेनोपॉज के लक्षण शुरू हो सकते हैं।
  • धूम्रपान: धूम्रपान करने वाली महिलाओं को अक्सर धूम्रपान न करने वाली महिलाओं की तुलना में पहले पेरिमेनोपॉज होता है। 

 

पेरिमेनोपॉज के लक्षण
पेरिमेनोपॉज के लक्षणों में शामिल हैं: 
  • अनियमित मासिक धर्म
  • मूड में बदलाव
  • हॉट फ्लैशेस और रात में पसीना आना
  • अनिद्रा
  • योनि में सूखापन
  • एकाग्रता में कमी
  • चिंता और अवसाद 
क्या करें?
यदि आपको लगता है कि आप पेरिमेनोपॉज से गुजर रही हैं, तो डॉक्टर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। वे उचित मार्गदर्शन और उपचार प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा, एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है, जैसे: 
  • संतुलित आहार
  • नियमित व्यायाम
  • तनाव प्रबंधन
  • योग और ध्यान 

By AMRITA

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